THE NOISE. THE NUANCE.

SOCHTANTRA / सोचतंत्रDIMAAG
DIMAAG
BAND HAI
दिमाग़ बंद है
Hindi satirical rap and alternative hip-hop. Satire that cuts through the noise, across rap, funk, rock, and psychedelic electronics.
10 TRACKS~44 MINUTESHINDI
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DIMAAG BAND HAI · 02 / 10
Bandar Ko Di Haldi
बंदर को दी हल्दी
Bandar Ko Di Haldi
सुना था हल्दी बड़ी काम की चीज़ है…
दवा भी है…
मसाला भी है…
फिर हल्दी पहुँची बंदर के हाथ…
और बंदर ने क्या किया?
बम पे…
मल दी!
बंदर को दी हल्दी!
उसने अपने बम पे मल दी!
काम की चीज़ थी, काम ना आई,
बंदर के हाथ लगी, शामत आई!
बंदर को दी हल्दी!
उसने अपने बम पे मल दी!
हाथ में हल्दी, दिमाग़ है खाली,
बंदर ने फिर वही हरकत कर डाली!
फ़ोन मिला था दुनिया से जुड़ने,
भाई लगा कमेंट में सब से भिड़ने!
इंटरनेट मिला दुनिया जोड़ने,
चाचा लगे अफ़वाहें छोड़ने!
कैमरा मिला यादें बनाने,
लोग लगे हादसे की रील बनाने!
माइक मिला था सच सुनाने,
भाई लगा पॉडकास्ट पे ज्ञान पेलने!
कुर्सी मिली थी सेवा करने,
साहब लगे सलाम करवाने!
कल तक पैदल, आज है गाड़ी,
हॉर्न बजाए, अकड़ है भारी!
हीरा दिया था चमकाने को,
बंदर लगा उससे पीठ खुजाने को!
दे दो पैसा!
दे दो पावर!
दे दो उसको…
पूरा टावर!
चाबी दे दो!
गाड़ी दे दो!
अक़्ल नहीं है?
फिर कांड देखो!
बंदर को दी हल्दी!
उसने अपने बम पे मल दी!
काम की चीज़ थी, काम ना आई,
बंदर के हाथ लगी, शामत आई!
बंदर को दी हल्दी!
उसने अपने बम पे मल दी!
हाथ में हल्दी, दिमाग़ है खाली,
अच्छी-ख़ासी चीज़ की वाट लगा डाली!
डिग्री मिली, पर अक़्ल ना आई,
पढ़-लिखकर भी समझ ना आई!
नौकरी मिली, बना अधिकारी,
पहले दिन से रिश्वत की तैयारी!
धर्म मिला था ख़ुद को जानने,
लोग लगे एक-दूजे को बाँटने!
जात मिली थी पहचान बताने,
उसी के नाम पे लगे लड़ाने!
विज्ञान ने सिखाया, सवाल उठाओ,
बंदर बोला, “अफ़वाह फैलाओ!”
एआई आया काम आसान बनाने,
भाई लगा नकली बाबा बनाने!
बोलने की आज़ादी मिली,
ज़ुबान मगर गाली पे अड़ी!
साधन अच्छा!
अच्छा!
नीयत…
टट्टी!
टेक्नोलॉजी नई!
सोच है घटिया!
ताक़त बड़ी!
बुद्धि छोटी!
फिर वही कहानी…
फिर वही गलती!
हल्दी आई…
बंदर आया…
सबने बोला…
“अब क्या होगा?”
बंदर मुस्कुराया…
बंदर को दी हल्दी!
उसने अपने बम पे मल दी!
बंदर को दी हल्दी!
बम पे मल दी!
बंदर को दी हल्दी!
बम पे मल दी!
क्या दिया?
हल्दी!
किसको दिया?
बंदर को!
उसने क्या किया?
बम पे मल दी!
थोड़ा सीखा, ज़्यादा सिखाया,
आधे ज्ञान पे खूब इतराया!
कानून बना था इंसाफ़ दिलाने,
लोग लगे उसमें छेद निकालने!
वोट मिला था सोच-समझकर देने,
बंदर लगा जात के नारे लगाने!
सड़क बनी तो कचरा डाला,
नल खुला तो पानी बहा डाला!
देश चाहिए सिंगापुर जैसा,
काम करेंगे?
“भाई, तू कर ले!”
सिस्टम चाहिए एकदम क्लीन,
अपनी सेटिंग?
“वो अलग सीन!”
दूसरा करे तो भ्रष्टाचार,
ख़ुद करे तो?
“जुगाड़ है यार!”
हर कोई बोले दुनिया गंदी,
आईना देखा?
बत्ती बंद थी!
गड़बड़ हल्दी में नहीं थी…
गड़बड़ बंदर में थी।
फ़ोन ख़राब नहीं था।
इंटरनेट ख़राब नहीं था।
पैसा ख़राब नहीं था।
ताक़त ख़राब नहीं थी।
आज़ादी ख़राब नहीं थी।
टेक्नोलॉजी ख़राब नहीं थी।
बस…
जिसके हाथ में दी…
वो बंदर निकला।
बंदर को दी हल्दी!
उसने अपने बम पे मल दी!
ताक़त मिली तो अकड़ दिखा दी,
ज़िम्मेदारी सारी भुला दी!
बंदर को दी हल्दी!
उसने अपने बम पे मल दी!
नई टेक्नोलॉजी!
पुरानी स्टुपिडिटी!
नई सेंचुरी!
वही मेंटैलिटी!
बंदर को दी?
हल्दी!
हल्दी का क्या किया?
मल दी!
कहाँ पे?
बम पे!!!
बंदर को दी हल्दी!
उसने…
अपने…
बम पे…
मल दी!!!
हल्दी बुरी नहीं थी…
हल्दी तो काम की थी।
बस बंदर के हाथ लग गई।
और बंदर?
बंदर पूरा ढक्कन था!
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