Apna Kaam Banta, Toh MC Janta
अपना काम बनता, तो एमसी जनता
Original lyrics booklet ↓देश बदल रहा है, भाई…
सबको चाहिए रिवोल्यूशन…
लेकिन पहले अपना कमीशन!
हा हा हा!
एक ही मंत्र है इस देश का…
अपना काम बनता…
तो जनता!
अपना काम बनता!
तो जनता!
जेब में नोट, ज़ुबान पे ज्ञान,
चेहरे पे सबके नकली ईमान!
अपना काम बनता!
तो जनता!
देश गया भाड़ में, कुर्सी है प्यारी,
अपनी जेब भरने की पूरी तैयारी!
अपना काम बनता!
तो जनता!
नेता बोले जनता की सेवा,
कुर्सी मिली तो खाने लगे मेवा!
मंदिर की बातें, मस्जिद का शोर,
पीछे से चलता पैसों का ज़ोर!
भाषण में ग़रीब, बंगले में राजा,
चुनाव के बाद सबका बैंड बाजा!
सड़कों पे गड्ढे, अस्पताल खाली,
फ़ोटो में चमके नेता की थाली!
फ़ाइल अटकी, बाबू मुस्काए,
मेज़ के नीचे हाथ बढ़ाए!
कल तक जो माँगे सबसे उधारी,
आज वही जनता पे झाड़े अफ़सरी!
सबको है जल्दी!
सबको है पैसा!
सच का क्या करना?
जब झूठ है ऐसा!
शर्म गई तेल लेने!
ईमान गया बिकने!
अपना काम निकलते ही,
लगे सबको ठेंगा दिखाने!
अपना काम बनता!
तो जनता!
जेब में नोट, ज़ुबान पे ज्ञान,
चेहरे पे सबके नकली ईमान!
अपना काम बनता!
तो जनता!
देश गया भाड़ में, कुर्सी है प्यारी,
अपनी जेब भरने की पूरी तैयारी!
अपना काम बनता!
तो जनता!
सिग्नल था लाल, पर गाड़ी भगाई,
पकड़े गए तो नोट की पर्ची थमाई!
लाइन में लगना? अरे पागल है क्या?
चाचा है अंदर, सेटिंग है भैया!
टैक्स पे भाषण, कैश में कमाई,
बिल माँगो तो आँख दिखाई!
फ़ेसबुक पे देशभक्ति का नारा,
सड़क पे कचरा फेंका दोबारा!
बेटी बचाओ, स्टेटस लगाओ,
घर की औरत को चुप कराओ!
रिश्वत को सब गाली देते,
अपना काम हो तो पैसे देते!
सबको चाहिए ईमानदार नेता,
ख़ुद का जुगाड़ कोई नहीं छोड़ता!
भाई…
समस्या सिर्फ़ नेता नहीं है।
समस्या सिर्फ़ सिस्टम नहीं है।
समस्या वो सोच है…
जो हर गली में मिलती है।
हर दफ़्तर में मिलती है।
हर घर में मिलती है।
और जब कोई पूछे…
देश का क्या होगा?
जवाब एक ही आता है…
अपना काम बनता…
तो जनता!!!
सबको हैं हक़, पर फ़र्ज़ नहीं,
बातें हैं बड़ी, पर शर्म नहीं!
ख़ुद की गलती पे पर्दा डालो,
दूसरे की गलती पे वीडियो बना लो!
धर्म का ठेका, जात का धंधा,
हर कोई लेकर घूमे एजेंडा!
मीडिया बिकता, हेडलाइन चिल्लाता,
सच बेचारा कोने में जाता!
डिग्री की क़ीमत, नौकरी का रेट,
क़ाबिल खड़ा है बंद गेट!
बच्चे का भविष्य, बाप का लोन,
नेता का बेटा विदेश में मौज!
देश को लूट के देशभक्त बनते,
झंडा उठाकर धंधे हैं करते!
ना लेफ़्ट का सच, ना राइट का धंधा,
सबसे बड़ा रोग है अपना एजेंडा!
अपना काम बनता!
तो जनता!
अपना काम बनता!
तो जनता!
ना शर्म, ना धरम,
बस पैसों का करम!
ना इंसाफ़, ना सच,
बस अपना ही स्वार्थ!
अपना काम बनता!
तो जनता!
किसका काम?
अपना काम!
किसका फ़ायदा?
अपना फ़ायदा!
जनता का क्या?
जनता!!!
अपना काम बनता!
तो जनता!
अपना काम बनता!
तो जनता!
और फिर हम पूछते हैं…
देश बदलता क्यों नहीं?
क्योंकि देश बदलने से पहले…
अपनी सोच बदलनी पड़ती है।
लेकिन सोच वही पुरानी…
अपना काम बनता…
तो जनता!